कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और compleet

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raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 05 Dec 2014 09:34

अगर एक पल भी उन्होने चूसना और जारी रखा होता तो मैं झाड़ ही जाती. लेकिन रुक के उन्होने मेरी टांगे खूब फैला के दुहरा ही कर दिया. लेकिन अभी भी उन्होने अपने लंड बजाय अंदर डालने के, उसके मोटे लाल गुस्साए सुपाडे को मेरी क्लिट पे रगड़ना शुरू कर दिया.

"ओह्ह डालो डाल लंड मेरी बुर मे प्लीज़ ओह्ह्ह्ह" मैं चीख रही थी.

उंगलियो से उन्होने मेरी चूत की पुट्तियो को फैलाया और फिर कस के पूरी ताक़त से उसे अंदर धकेल दिया. 5*6 करारे धक्को के बाद वो पूरी तरह अंदर था.

जैसे ही सुपाडे ने बच्चेदानि पे सीधे धक्का मारा और लंड की जड़ मेरे क्लिट से टकराई, दर्द से मेरी जान निकल गयी.

जैसे ही सुपाडे ने बच्चेदानि पे सीधे धक्का मारा और लंड की जड़ मेरे क्लिट से टकराई, मज़े से मेरी जान निकल गयी.

मैं दर्द से चीख रही थी, मज़े से सिसक रही थी, झाड़ रही थी झड़ती जा रही थी.

सुहागरत से अब तक मैं न जाने कितनी बार झाड़ चुकी थी पर आज तो बस एक के बाद एक.

वो रुके हुए थे पूरी तरह अपने मोटा लंबा लंड मेरी चूत मे डाल के. जैसे ही मैं रुकी उनके हाथो ने मेरी चुचिया पकड़ के कस के मसलना शुरू कर दिया. उनके होंठ भी मुझे चूम रहे थे, मेरे खड़े निपल्स चूस रहे थे चाट रहे थे .थोड़ी ही देर मे मेरी आँखे खुल गयी, मुस्कराते मेरे चूतड़ भी अपने आप हिलने लगे.

बस क्या था, उन्होने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर कस के अंदर धकेल दिया.

एक बार फिर मेरी उत्तेजित क्लिट रगड़ गयी. अब मैं खुद उन्हे अपनी बाहों मे भींच रही थी, चूतड़ उचका रही थी कमर पटक रही थी. फिर क्या था,उन्होने सुपाडे तक हल्के हल्के लंड को बाहर निकाला और मेरी दोनो चुचियो को कस के पकड़ के एक बार मे ही पूरा अंदर तक थेल दिया और वो सीधे मेरी बच्चेदानि पे5*6 बार इसी तरह वो सुपाडे तक निकाल के पूरी ताक़त से डाल देते दर्द के मारे मेरी हालत खराब थी. मैं चीख रही थी चिल्ला रही थी. और वो मेरी चिल्लाहट भी रोकने की कोई कोशिश नही कर रहे थे. कुछ देर तक कस कस के इस तरह चोदने के बाद उनका लंड धीरे धीरेमेरी चूत मे रगड़ता ..घिसटता अंदर सरक सरक के घुसता और फिरमस्ती से मेरी हालत खराब हो जाती, ज़ोर ज़ोर से सिसकती, कस कस के चूतड़ पटकती. धक्कमपेल चुदाई शुरू हो चुकी थी. उनके होंठ मेरे निपल्स कस कस के चूस रहे थे, एक हाथ कस कस के मेरी चुचि दबाता मेरे निपल्स फ्लिक करता, दूसरा मेरे क्लिट को छेड़ता. इस तिहरे हमले से मेरी जान निकल रही थी और साथ साथ उनका मोटा लंड.

"ओह्ह ओह ओह्ह उंह उहह." मैं सिसक रही थी.

"क्यो रानी मज़ा आ रहा है चुद्वाने मे, " पूरी ताक़त से लंड घुसेड के वो बोलते.

"हाँ अहह.हा राजा हाँ." मैं सिसकी भरते बोलती.

"तो बोल ना "रुक के मेरी क्लिट पिंच करते बोले.

"हा चो..चो ..चोदो मेरी चूत कस कस के..ओह बहुत अच्छा लग रहा..और और चोदो."

मैं बोली.

फिर तो सतसट गपडप.सतसट गपगपहच हच चुदाई चालू थी. वो बोलते जा रहे थे बड़ी रसीली चूत है तेरी और मैं भी चूतड़ उठा उठा के कहती हाँ हाँ चोदोचोदो.

मैं पता नही कितनी बार झड़ी लेकिन जब तक वो झाडे मैं लगभग बेहोश सी हो गयी थी. मुझे बस इतना याद था कि उन्होने मेरे चूतड़ दोनो हाथो से पकड़ के उठा रखे थे और हम दोनो झाड़ रहे थे. झड़ने के बहुत देर बाद भी उन्होने इसी तरह से सारा का सारा वीर्य मेरी चूत रानी गटक कर गयी. बाकी जो बचा वो मेरी गोरी चिकनी जाँघो पे बह रहा था, गढ़ा सफेद, थक्केदार.

जब मेरी आँख खुली तो मैं उनके बाँहो मे बँधी थी. अचानक मेने देखा लाइट पूरी तरह जल रही थी, सिर्फ़ नाइट लैंप या बेड लाइट ही नही, सारी की सारी. मुझे ध्यान आया,

कमरे मे मैं जैसे घुसी थी, उसी समय उन्होने मुझे पकड़ लिया था और उस समय मुझे याद भी नही रहा बत्ती बंद करने के लिए बोलने को. मेने नीचे निगाह डाली तो मेरे किशोर उरोजो पे, पिछली दो रातो के थोड़े हल्के हो रहे निशानो के साथ, आज के भी ताजे निशान मैं शरमाई नही लेकिन उनके चौड़े सीने मे सिकुड गयी.

उन्होने कस के मुझे चूम लिया. मेने भी हल्के से उन्हे किस कर लिया. फिर तो कस के चुम्मा चाटी चालू हो गयी. जब उनकी जीभ मेरे मूह मे घुसती तो मैं भी उसे हल्के से चूस लेती, काट लेती. वो कस कस के मेरे बाला जोबन दबाते तो मैं भी उनकी पीठ कस के पकड़ लेती. कुछ देर मे मैं उनकी गोद मे थी. उनकी उंगलिया मेरी चूत को सहला रही थी, दबा रही थी. मेरी जंघे अच्छी तरह फैली हुई थी, और उनका खुन्टा भी फिर सेमेरे मेहंदी लगे गोरे गोरे हाथ पकड़ के उन्होने लंड पकड़ते हुए कहा,

"रानी ज़रा प्यार से पकड़ ना, झिझकती क्यो है. तेरे लिए तो है." झिझकते हुए पकड़ के मैं बोली,

"तो मैं कब कह रही हू कि आपकी बहनो के लिए है,"

"लेकिन अगर मेने, तेरी बहन को पकड़ाया तो तब तो एतराज नही होगा." क्लिट टच करते वो बोले.

"ना पकड़ाया तो ऐतराज होगा, साली है आपकी लेकिन सिर्फ़ मेरी बहन या"

"सभी तुम्हारी भाभी बल्कि सारी ससुराल वालियाँ" बो मेरे निपल्स चूस रहे थे, उसे छोड़ के बोले. मेने कस के उनका लंड दबाया और चूतड़ उचका के उन्हे छेड़ा,

"याद रखिएगा आप ने सारी ससुराल वालिया बोला है, सिर्फ़ साली और सलहज नही. वैसे मेरी ससुराल वालीयो खास तौर से मेरी ननदो को आप चाहे पकड़ाए, घोंटए मेरी ओर से पूरी छूट है."

"बताता हू तुझे अभी" उनके होंठो को जो अभी नया नया स्वाद लगा था, चूंची से सीधे वो चिकनी चूत चाटने मे लग गये. उनकी उंगलियो ने मेरी चूत की पुट्तियो को कस के दबा रखा था जिससे उनके वीर्य की एक भी बूँद, बाहर ना छलके. अब की बार फ़र्क सिर्फ़ इतना था कि उनका सर मेरे पैरो की ओर था. 'सिक्स्टी नाइन 69' की पोज़ मे, और लंड सीधे मेरे मूह के पास.

पहली बार मैं 'उसे' इतनी नेजदीक से देख रही थी, और वो भी पूरी रोशनी मे बहुत प्यारा सेक्सी लग रहा था. मन तो कर रहा था बस गप्प कर लू, खूब लंबा, मोटा, गोरा.

मेने उसे मुट्ठी मे पकड़ लिया. मेरे हाथो के छूते ही जैसे वो फूल के कुप्पा हो गया, और मोटा, सख़्त और मेरी मुट्ठी से निकलने के लिए बेचैन. लेकिन आज मैं उसे इतनी आसानी से छोड़ने वाली नही थी. सहलाते हुए अंगूठे और तर्जनी के बीच दबा के,

मैं उसे आगे पीछे कर कर रही थी. मुझे शरारत सूझी. मेने लंड का चमड़ा धीरे धीरे पीछे कर के उसे खोल दिया. खूब मोटा, लाल ग़ुस्सेल, रस भरा, सूपड़ा, एक आँख सा छेद हल्का सा खुला, मोटे लॉलीपोप सा मैं सोच रही थी कि अगर मैं अपना पूरा मूह खोलू तो भी शायद ही उसे लील सकु. मेने थोड़ा सा लंड को उपर उठाया तो नीचे उनके कसे कसे बॉल्स, लटक रहे थैले से,दिख रहे थे. ( जिसे बसंती पेल्हड़ कहती थी).

मेने एक हाथ से उसे भी हल्के से छू दिया .उनका लंड एकदम गिन गिना गया. अब वह एक दम तन गया था, उसकी एक एक नस साफ साफ दिख रही थी, खूब कड़ा, लोहे के रोड सा, जिससे मुझे उनकी हालत का अंदाज हो गया था. लेकिन मैं 'उसे' छोड़ने वाली नही थी.

क्रमशः……………………………………

शादी सुहागरात और हनीमून--32

gataank se aage…………………………………..

main to hava me udane lagi. jab sab aurate jane lagi to main bhi kamare ki or or mudi. majhali nanad bhanebhane rahi thi, aur kare 'bachchi' se shadi, abhi 12 ve ka imtahan dene jane hai,

phir graduation karengi kab grahsthi samhalengi are main itani achchi padhi likhi ladaki mene anesune kar diya. meri saas mujhse khush, jethani khush aur mere saiya khush.

saiya to mere itane bethi, jaise main kamare me ghusi wo palang par pahale se taiyaar.

(neyi karadhan ki ghugharuo ki avaj ne unhe pahale hi mere ane ka sanket de diya tha) mene daravaja band kar ke dararavaje ke paas hi khade ho apne anchal lahara apne irada jata diya. palmge ke paas aa ke unhe dikhate hue mene sadi dhire dhire kholi aur dresigh roo ki or mudi par unhone palmg pe mumjhe apne upar khinch liya.

"he change to kar lena do ne abhi ati hu ne, bas do minet ." main boli.

"umhu aaj aise hi bas aa jao ne." unhone manuhar ki.

main kaun hoti thi mane karane vali aur karane se hi kaun chut jati. unhone apni baho me kas ke bhinch rakha tha. mene apne petikot ke upar se hi, pajame ko phadate unke 'khunte' ka pressure mahasus kiya. unka tambu puri tarah tan chuka tha.

mujhe bahut achcha laga. mene use halke se dabaya aur choli se chalakate hue joban unke chehare pe ragad ke boli,

"aj mera balam bahut besabara ho raha hai"

unhone kas ke choli ke upar se hi mere dono joban kas kas ke chum liye. aur bole aaj tumane bahut achcha gaya. main boli ki achcha to janeb yaha kamare me baith ke chup ke sun rahe the. wo bole lekin saph saph suneyi nahi de raha tha. ek baar phir se sunaao ne. main samajh gayi ki wo khul ke mere muh se kya sunene chah rahe the, lekin main chidhate hue boli. kya suneum bhakti sangit, filmi ya lok sangit mene to tino suneye the. wo bichare, bole lok sangit. mene phir pucha, shadi ke gane ya soharaunke muh pe apni choli ragadate huye main boli, are saph saph kyo nahi kahate apni bahano ka hal sunene ka man hai. unke upar lete hi lete mene sunene shuru kiya pahale,

"choti dane vala bichua ajabe bane wo bichua pahane hamare semya ki bahane, anjali chinaaro,

are hamare saiya se roj chudavat baje, aur phir,

suno sare logo hamare saiya ki badai,

are unki bahane are hamari nanadi badi har jayi,

hamare saiya se wo ankhiya ladave, ankhiya ladavai, jobane misavavai,

are suno sare logo hamare saiya ki badai, kachahari rod me di hai gavahi are anjali salli badi harajayi, rajani chinaaro badi harajayi,

hamare saiya se, are apne bhaiya se khub chudavayi,

chuchi dabavaye aur bur maravaye anjali chinaaro khub chudavaye,

pajame ke andar unka kunTaa patthar ka ho gaya tha. mene upar se hi kas ke use apni jagho ke bich ragada. mere blouse ke batan ab tak khul chuke the. us se chalakate ubhar mene unke uttejit chehare pe male aur agali gali shuru kar di.

are nili si ghodi gaj neem se bandi chalo dekh to lo are dekhane gayi hamari nanadi chiner, jineke das das bhatar,

wo to chadh gayi atut, unki dikh gayi chut,

chalo dekh to lo are dekhane gaye are anjali chinere jineke mere saiya yaar, jineke mere bhaiya yaar wo to chadh gai khajur unki dikh gayi bur chalo dekh to lo.

ab tak unki halat kharaab ho gayi thi. ek jhatake me unhone meri bra utar ke phenk di aur niche ki or sarak ke bole. pahale ab main teri bur dekhata hu. mera petikot aur painty pal bhar me alag ho gayi. 'wo'bhi unke lund ka dhakka kha kha ke gili ho chuki thi.

pahale to unhone 'use' mutthi me bhar ke daboch liya aur masal diya, phir do ugaliyo ke beech meri gulabi puttiyo ko kas ke masal diya. unka dusara hath mere chutad ke niche takiye rakh ke use achchi tarah ubhar raha tha. meri dono jamghe apne aap phail gayi thi. unke chumban se achanek main uchal padi, sidhe vahi par aur puri takat se. unke honth hat gaye lekin ab unki juban naapahale to halke se mere bhagoshhtho ke bahar se phir halke se use phaila ke wo andar ghusi, aur thoda andar tak chatate hue.pelane shuru kiya. main machal rahi thi tadap rahi thi . unki sirph jibh meri deh ke smpark me thi aur wo bhi sirph tip mere andar ghusi, wo bhi meri tarah,

mere andar machal rahi thi, tadap rahi thi. ek pal ke liye unhone jibh bahar nikala aur pucha bol kaisa lag raha hai.

umhaumh..umuhmhmmaoh umh meri avaje bata rahi thi ki mujhe kaisa lag raha hai.

phir kya tha, unhone juban to bahar nikal li lekin ab upar se kas kas ke chapad chapad meri chikani choot chatane shuru kar diya. thodxi hi der me wo klit ke thik niche se shuru kar ke piche vale ched takamain kamar hila rahi thi patak rahi thi. lekin ye to sirph shuru at thi. kuch hi der me meri kasi kishor bur, unke hontho ke bich thi aur jibh jo maja, pichali rato me unka lund le raha tha, andar bahar andar bahar. pamch * das minet me hi meri halat kharaab thi. wo kas kas ke meri choot chus rahe the aur hacha hach unki jibh meri choot chod rahi thi. mer man kar raha tha bas wokarem. jab unhone jibh bahar nikali to mujhe laga ki ab wo shuru karemge par jibh ki jagah unki do lmbi ungaliyo ne li, vaisalin me achchi tarah lithadi chupadi. ek baar me hi umgaliya jad tak andar. pahale to wo khachakhach andar bahar hoti rahi aur phir gol gol charo or meri choot ke andar ghus ke, use chauda karati, usaki divalo ko ragadati vaisalin lep rahi thi. unki jibhameri doctor bhabhi ne to shadi ke pahale hi meri klit ka ghughat ughad diya tha ab uttejane ke mare wo khub gulabikadimast. unki jibh ne use halke se chu bhar diya to mujhe laga meri deh me 440 wolt ka current lag gaya.

lekin jibh use ruk ruk ke sahalati rahi, chedati rahi. unke ras lena me expert hontho ne bhi meri klit bhinch liya aur use halke halke chus rahi thi.

"oh oh ohakaro ne ab nahi raha jata" main besharam ho ke bol rahi thi. unhone meri klit aur kas ke chusane shuru kar diya.

"dalo ne oh plijadal do bas bas ab aohh " main jhadane ke kagar pe thi. ab muh utha ke unhone pucha,

"bol ne kya daal du kya karum. bol ne saph saph." aur phir kas ke klit chusne lage.

"oh ..oh ohh daal doapne apne wooh apne lund daal de..dal."

"are lund daal ke kya karu me ri jan kaha dalum" ye bol ke wo phir se aur abhki unhone meri klit hlke se hontho se daba bhi di.

main chutad patak rahi thi. puri deh me tarang daud rahi thi. kas ke unke bal pakad ke bhinch ke boli,

"are daal dal do apne lund meri choot me ohh chod do chod mujhe ohh."

agar ek pal bhi unhone chusane aur jari rakha hota to main jhad hi jati. lekin ruk ke unhone meri tamge khub phaila ke duhara hi kar diya. lekin abhi bhi unhone apne lund baje andar dalane ke, uske mote lal gussaye supade ko meri klit pe ragadane shuru kar diya.

"ohh dalo daal lund meri bur me plijaoh" main chikh rahi thi.

ungaliyo se unhone meri choot ki puttiyo ko phailaya aur phir kas ke puri takat se use andar dhakel diya. 5*6 karare dhakko ke baad wo puri tarah andar tha.

jaise hi supade ne bachchedani pe sidhe dhakka mara aur lund ki jad mere klit se takarayi, dard se meri jan nikal gayi.

jaise hi supade ne bachchedani pe sidhe dhakka mara aur lund ki jad mere klit se takarayi, maje se meri jan nikal gayi.

main dard se chikh rahi thi, maje se sisak rahi thi, jhad rahi thi jhadati ja rahi thi.

suhagarat se ab tak main n jane kitani baar jhad chuki thipar aaj to bas ek ke baad ek.

wo ruke hue the puri tarah apne mota lmba lund meri choot me thus ke. jaise hi main ruki unke hatho ne meri chuchiya pakad ke kas ke masalane shuru kar diya. unke honth bhi mujhe chum rahe the, mere khade nipals chus rahe the chat rahe the .thodi hi der me meri aankhe khul gayi, muskarate mere chutad bhi apne aap hilane lage.

bas kya tha, unhone lund ko thoda sa bahar nikala aur phir kas ke andar dhakel diya.

ek baar phir meri uttejit klit ragad gayi. ab main khud unhe apni baho me bhinch rahi thi, chutad uchka rahi thi kamar patak rahi thi. phir kya tha,unhone supade tak halke halke lund ko bahar nikala aur meri dono chuchiyo ko kas ke pakad ke ek baar me hi pura andar tak thel diya aur wo sidhe meri bachchedani pe5*6 baar isi tarah wo supade tak nikal ke puri takat sedard ke mare meri halat kharaab thi. main chikh rahi thi chilla rahi thi. aur wo meri chillahat bhi rokane ki koyi koshish nahi kar rahe the. kuch der tak kas kas ke is tarah chodane ke badaunka lund dhire dhiremeri choot me ragadata ..ghisatata andar sarak sarak ke ghusata aur phiramasti se meri halat kharaab ho jati, jor jor se sisakati, kas kas ke chutad patakati. dhakapel chudai shuru ho chuki thi. unke honth mere nipals kas kas ke chus rah the, ek hath kas kas ke meri chuchi dabata mere nipals phlik karata, dusara mere klit ko chedata. is tihare hamale se meri jan nikal rahi thi aur sath sath unka mota lund.

"ohh oh ohh umh uhh." main sisak rahi thi.

"kyo rani maja aa raha hai chudvane me, " puri takat se lund ghused ke wo bolate.

"ha ahhhhhhhhh.ha raja ha." main siski bharate bolati.

"to bol ne "ruk ke meri klit pinch karate bole.

"ha cho..cho ..chodo meri choot kas kas ke..oh bahut achcha lag raha..aur aur chodo."

main boli.

phir to satasat gapadap.satasat gapagapahach hach chudai chalu thi. wo bolate ja rahe the badi rasili choot hai teri aur main bhi chutad utha utha ke kahati ha ha chodochodo.

main pata nahi kitani baar jhadi lekin jab tak wo jhade main lagabhag behosh si ho gayi thi. mujhe bas itane yaad tha ki unhone mere chutad dono hatho se pakad ke utha rakhe the aur ham dono jhad rahe the. jhadane ke bahut der baad bhi unhone isi tarah sesara ka sara viry meri choot rani gatak kar gayi. baki jo bacha wo meri gori chikani jamgho pe bah raha tha, gadha saphed, thakkedar.

jab meri aankh khuli to main unke bamho me bandi thi. achanek mene dekha lait puri tarah jal rahi thi, sirph neit laimp ya bed lait hi nahi, sari ki sari. mujhe dhyan aya,

kamare me main jaise ghusi thi, usi samay unhone mujhe pakad liya tha aur us samay mujhe yaad bhi nahi raha batti band karane ke ke liye bolane ko. mene niche nigah dali to mere kishor urojo pem, pichali do rato ke thode halke ho rahe nishano ke sath, aaj ke bhi taje nishanemain sharmayi nahi lekin unke chaude sine me sikud gayi.

unhone kas ke mujhe chum liya. mene bhi halke se unhe kis kar liya. phir to kas ke chumma chati chalu ho gayi. jab unki jibh mere muh me ghusati to main bhi use halke se chus leti, kaat leti. wo kas kas ke mere bala joban dabaate to main bhi unki peeth kas ke pakad leti. kuch der me main unki god me thi. unki ungaliya meri choot ko sahala rahi thi, daba rahi thi. meri jamghe achchi tarah phaili huyi thi, aur unka kunTaa bhi phir semere mehandi lage gore gore hath pakad ke unhone lund pakadate hue kaha,

"rani jara pyar se pakad ne, jhijhakati kyo hai. tere liye to hai." jhijhakate hue pakad ke main boli,

"to main kab kah rahi hu ki apaki bahano ke liye hai,"

"lekin agar menem, teri bahan ko pakadaya to thi to etaraj nahi hoga." klit tach karate wo bole.

"ne pakadaya to aitaraj hoga, sali hai apaki lekin sirph meri bahan ya"

"sahitumhari bhabhi balki sari sasural valiyam" bo mere nipals chus rahe the, use chod ke bole. mene kas ke unka lund dabaya aur chutad uchka ke unhe cheda,

"yaad rakhiyega aap ne sari sasural valiya bola hai, sirph sali aur salahaj nahi. vaise meri sasural valiyo khas taur se meri nanado ko aap chahe pakadaye, ghontaye meri or se puri chuT hai."

"Batata hu tujhe abhi" unke hontho ko jo abhi neya neya svad laga tha, chunchi se sidhe wo chikani choot chatane me lag gaye. unki ungaliyo ne meri choot ki puttiyo ko kas ke daba rakha tha jisase unke veerya ki ek bhi bund, bahar ne chalake. abhki fark sirph itane tha ki unka sar mere pairo ki or tha. 'sixty nine 69' ki pose me, aur lund sidhe mere muh ke paas.

pahali bar main 'use' itani nejadeek se dekh rahi thi, aur wo bhi puri roshani me bahut pyara sexy lag raha tha. man to kar raha tha bas gapp kar lu, khub lamba, mota, gora.

mene use mutthi me pakad liya. mere hatho ke chute hi jaise wo phul ke kuppa ho gaya, aur mota, sakht aur meri mutthi se nikalane ke liye bechain. lekin aaj main use itani asani se chodane vali nahi thi. sahalate hue amguthe aur tarjani ke beech daba ke,

main use age piche kar kar rahi thi. mujhe shararat sujhi. mene lund ka chamada dhire dhire piche kar ke use khol diya. khub mota, lal gussel, ras bhara, supada, ek ankh sa ched halka sa khula, mote lollypop samain soch rahi thi ki agar main apne pura muh kholu to bhi shayad hi use lil saku. mene thoda sa lund ko upar uthaya to niche unke kase kase balls, latak rahe thaile se,dikh rahe the. ( jise basanti pelhad kahati thi).

mene ek hath se use bhi halke se chu diya .unka lund ekdam gin gine gaya. ab vah ek dam tan gaya tha, usaki ek ek nes saph saph dikh rahi thi, khub kada, lohe ke rod sa, jisase mujhe unki halat ka andaj ho gaya tha. lekin main 'use' chodane vali nahi thi.

kramashah……………………………………


raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 05 Dec 2014 09:35

33

गतान्क से आगे…………………………………..

हालत तो मेरी भी कम खराब नही थी. उनकी जीभ और होंठ मेरी चूत की पुट्तियो को खूब कस के चूस चाट रहे थे और साथ साथ क्लिट को भी. लेकिन अंदर दोनो उंगलिया घुसी थी, पूरी गहराई तक वैसलीन चुपदती. उन्होने वैसलीन की बॉटल मेरी ओर बढ़ा दी.

मेने हाथ बढ़ा के उसे पकड़ लिया.

खूब सारी वैसलीन ले के, मेने उनके खड़े कड़े 'चर्म दंड' पे अच्छी तरह पोत दिया. फिर 'उसे' दोनो हाथो मे ले के, जैसे कोई ग्वालन मथानी मथे, (अब वो मेरी एक मुट्ठी मे समाने लायक नही रह गया था) इतने अच्छा लग रहा था उसे छूना कितना कड़ा कड़ा मेने थोड़ी और वैसलीन ली और सीधे उसकी जड़ से, (उनके भी एक भी बाल नही थे, लगता था जैसे अभी जस्ट शेव किया हो) लेके सीधे उपर तक फिर से लिथड के मलने मसलने लगी. एक दम चमक रहा था वो, वैसलीन लगाने से.

चमड़ी को हटा एक बार फिर से मेने उनके सूपदे को खोल दिया. वो अब और फूल सूज गया था. तीन उंगलियो मे, ढेर सारी वैसलीन निकाल के मेने उनके सूपदे पे अच्छी तरह लिपॅड चुपड दिया. उसके बीच से उसकी 'आँख' अभी भी झाँक रही थी.

शरारत से मेने एक उंगली मे वैसलीन लेके, जैसे कोई तिलक लगाए उस पे लगा दिया.

वो बेकरार हो रहे थे और मैं भी. जितने तकिये कुशन थे सब उन्होने मेरे चुतडो के नीचे लगा दिए और मेरी फैली जाँघो के बीच आ गये. अब उन्होने मेरी टांगे मोडी नही, बल्कि खूब कस के चौड़ी कर दी और अपनी उंगलियो से मेरी पुट्तियो को खोल के सीधे लंड अंदर थेल दिया. मेरा चूतड़ इतना उठा था मुझे साफ साफ दिख रहा था कि कैसे इंच इंच, सूत सूत उनका मोटा लंड मेरी कसी चूत मे घिसट रगड़ के जा रहा था. अबके उन्हे कोई जल्दी नही थी. वो मेरी पतली कमर और मोटे चूतड़ पकड़ के धीरे धीरे थेल रहे थे. कमरे की सारी रोशनी जल रही थी. मैं देख रही थी कैसे सरक सरक केमस्ति से मेरी हालत खराब हो रही थी. एक तिहाई अभी बाहर रहा होगा कि अब उसका घुसना मुश्किल लग रहा था. वो अपनी कमर से पूरी ताक़त सेदर्द के मारे मेरी भी फटी जा रही थी. उनसे नही रहा गया. मेरी दोनो टांगे उनके कंधे पे और मेरी कलाई पकड़ के उन्होने.एक बार फिर मेरी आधी चूड़िया टूट गयी. दर्द के मारे मैं चीख पड़ी. बच्चेदानि पे जैसे ही सूपदे ने कस के ठोकर मारी मस्ती से मेरी हालत खराब हो गयी. घुस तो पूरा गया लेकिन जैसे किसी पतली गर्दन वाली शीशी मे कोई खूब मोटा सा कर्क ठूंस देबास वही हालत मेरी हो रही थी. वो अब मेरी क्लिट पे अपने लंड का बेस हल्के हल्के रगड़ रहे थे और अपने आप मेरी कमर भी साथ साथ.

जैसे कभी इम्तहान मे जब पर्चा बँटे तो सब कुछ भूल जाए लेकिन बाद मे धीरे धीरे याद आने लगे वही हालत मेरी हो रही थी. पहले दिन तो कुछ भी नही याद रहा,

क्या सहेलियो ने बताया, क्या भाभियो ने सिखाया लेकिन अब धीरे धीरे सब कुछ भाभी की ट्रेनिंग, जो मेनुअल मे पढ़ा, देखा, जिम मे एक्सररसाइज़ की आज शाम को ही भाभी ने फोन पे बात करते समय डाँट लगाई थी, शादी के बाद से मेने पी.सी एक्सररसाइज़ करनी बंद कर दी थी. भाभी ने डाँट के कहा था, हर दो तीन घंटे बाद भले ही सब के साथ बैठी हो अपनी चूत धीरे धीरे 20 सेकेंड तक सिकोडो और फिर पूरी ताक़त से 20 सेकेंड तक सिकोड के रखो और फिर हल्के हल्के 20 सेकेंड तक रिलॅक्स करो.. 5 से 10 बार तक और सिकॉड़ते समय ये हमेशा सोचो कि तेरी बुर मे राजीव का लंड है.

जब मेने हंस के कहा कि भाभी अगर वो जब सच मुच मे अंदर हो तो वो बोली. फिर तो छोड़ना मत, ज़रूर करना. ये सोचते सोचते अपने आप मेरी चूत उनके लंड पे सिकुड़ने लगी और कस के भींच दिया. मुझे ये नही पता था इसका इतना ज़ोर दार असर होगा, मस्ती से उनकी हालत खराब हो गयी. वो कस कस के मेरी चूंचिया मसलने लगे, चूमने लगे और फिर उन्होने वो जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी कि बस.. पोज़ बदल बदल के, कभी मेरी दोनो टांगे दुहरा देते,.. कभी उठा देते, कभी एक उनके कंधे पे और दूसरी फैली पिस्टन की तरह लंड धक धक अंदर बाहर.. सतसट सतसट.. मेरी चूंचिया कस के मसल के वो बोले, 'क्यो आ रहा है मज़ा चुद्वाने मे'. 'एक दम' मैं बोली. ले ले मेरा लंड दोनो हाथो से मेरा चूतड़ पकड़ के वो बोले.'देदे ना..'

मेने भी अपनी टांगे उनकी पीठ के पीछे कैंची की तरह फँसा दी और कमर उठाती बोली. ले ले ना

उन्होने मुझे उठा के अपनी गोद मे बैठा लिया था और उनकी धक्का पेल चुदाई चालू थी. एक हाथ से वो मेरे जोबन मसलते और दूसरे से मेरी पीठ पकड़ के कस कस के. और मैं भी उनका साथ दे रही थी. 'कैसा लग रहा है मेरा लंड', उन्होने कस के धक्का लगाते ही पूछा. जवाब मेरी चूत ने दिया.. कस के उनके लंड को भींच के.

'तेरी चूंचिया बड़ी मस्त मस्त है' कस के उन्होने काट के कहा. मेने भी उन्हे उनके सीने मे रगड़ दिया. हे तू भी तो बोल, उनसे नही रहा गया. हल्के से उनके एअर लॉब्स मेने काट लिए. 'हां अच्छा लग रहा है', मैं हल्के से बोली. 'अरे क्या अच्छा लग रहा है, बोल नही तो' वो लंड ऑलमोस्ट बाहर निकाल के बोले और चुदाई रोक दी. उनके कान मे जीभ की नोक से सहलाते हुए मैं धीमे से बोली, 'चुद्वाना मेरे राजा'. फिर क्या था, उन्होने मुझे गोद मे लिए लिए धक्का पेल चुदाई शुरू कर दी. मुझे लगा कि हम दोनो किनारे की ओर बढ़ रहे है लेकिन थोड़ी देर मे उन्होने फिर पलटा.

अब मेरी पायल और बिछुए खामोश थे और मेरी चौड़ी नई करधन की धुन सुन रहे थे. मैं उपर थी और वो नीचे. हालाँकि धक्के अभी भी वही लगा रहे थे, नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा के, मेरी पतली कमर पकड़ के मुझे अपने लंड पे उपर नीचे कर के कुछ देर मे मैं भी उनका साथ देने लगी. जब वह उचका के लंड बाहर निकाल देते तो मैं अपनी कमर और नितंबो के ज़ोर से धीरे धीरे, तिल तिल उसे अंदर लेती और बहती रोशनी मे उसे सरकते हुए अंदर जाते हुए देखती. जब मेरी चूत पूरा लंड घोंट लेती तो अपने आप उसे भींचने लगती, चूत सिकुड़ने लगती. कुछ ही देर मे मैं न स्रिर्फ उनका साथ दे रही थी बल्कि कस कस के धक्के भी. हालाँकि जल्द ही मैं थक भी रही थी. लंड जब एक दम जड़ तक घुस गया तो मेने उनके दोनो हाथ कस के पकड़ लिए (जैसे वो मेरी कलाइयाँ पकड़ते थे), और लंड को ज़रा भी बाहर निकाले बिना,

थोड़ा उनकी ओर झुक के आगे पीछे करने लगी. सूपड़ा सीधे मेरी बच्चेदानि से रगड़ खा रहा था और लंड का बेस मेरी क्लिट से. मस्ती से हम दोनो की हालत खराब थी.

मेने देखा कि उनकी निगाहे सीधे मेरी झुकी चूंचियो पे है, मुझे शरारत सूझी. मेने अपने किशोर जोबन उनके चेहरे के उपर किए और जैसे ही वो चूमने को बढ़े, उसे दूर हटा लिया. मैं उसे पास ले जाती और जैसे ही लालच के वो पास आते बस मैं हटा लेती. मेरी खड़े निपल्स उनके होंठो से एक इंच दूर रहे होंगे कि मेने पूछा,

"बहुत मन कर रहा है?"

"हां" वो बेताब हो के बोले.

"अच्छा तो मेरा बड़ा है कि अंजलि का" उनके होंठो को किशोर जोबन से चुलके मेने पूछा.

"तुम्हारा बड़ा है." वो बेसबरे हो रहे थे.

"बस एक सवाल और, सही बोलॉगे तो मिलेगा. अंजलि का दबावाने लायक हो गया है कि नही?".

"हा..हा हो गया है."

"ओह पूरा बोलो ना क्या दबावाने लायक हो गया है." मेने चूंची उनकी पहुँच से दूर हटा ली.

"उसकी उसकी छाती सीना जोबन. चूंची"

"अरे पूरा बोलो ना अंजलि की चूंची किस लायक हो गयी है" और मेरी चूत ने कस के उनका लंड भींच दिया. मेरी सत्रह साल की जवान चूंचिया भी अब उनके चेहरे के पास थी.

"उसकी उसकी अंजलि की चूंची दबावाने लायक हो गयी है." वो बोले " अरे तो दबाते क्यो नही उस मस्त माल की चूंची देख तुमसे मेने अपनी ननद की चूंची ने दबावाई तो कहना." ये कह के मेने अपनी चूंची उनके होंठो के बीच कर दी और कस कस के चोदना शुरू कर दिया. लेकिन उन्होने पलट के मुझे नीचे कर दिया और जबरदस्त चोदते हुए बोले,

"अरे पहले अपनी चूंची तो दबवा लो, फिर बाद मे अपनी ननद का इंतज़ाम करना."

"मंजूर है मुझे.. चलो बाद मे ही सही, ये तो मान लिया कि तुम्हारा भी मन करता है उस की चूंचिया दबाने का." फिर तो उन्होने वो कस के धक्के लगाए, मैं थोड़ी ही देर मे झदाने लगी और जब मेरी चूत ने कस के साथ साथ उनके लंड को सिकोड़ना शुरू किया तो साथ मे वो भी.

raj..
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Re: कामुक-कहानियाँ शादी सुहागरात और हनीमून

Unread post by raj.. » 05 Dec 2014 09:36

आज जब उन्होने दूध का ग्लास मेरे मूह से लगाया तो ये जानते हुए भी कि इसमें क्या पड़ा है और इसका मुझ पे क्या असर होने वाला है, मेने उसे गदप कर लिया. वो और शरारती, दूध तो उन्होने पिया ही, रखे रखे उसमे मलाई सी पड़ गयी थी. वो उन्होने दो उंगली मे निकाल के मेरी चूत पे लपेटी और लगे चाटने. और इसके बाद जब वो उपर आए तो मेने जोड़ा पान भी अपने होंठो मे ले के उनके होंठो मे. तभी मेरी निगाह, बगल के टेबल पे पड़े रिमोट पे पड़ी. दोपहर को उन्होने यही रख दिया था, मुझे याद आया. मेने पूछा क्यो चला दू, और वो हंस के बोले एकदम.

वो, उसका लंड लोल्लपोप की तरह चूस रही थी. "साली क्या गपा गॅप चूस रही है." उन के मूह से निकला. फिल्म क्या किसी कपल की हनिमून मे शॉट की गयी फिल्म लग रही थी क्योंकि कॅमरा आंगल बिल्कुल भी नही चेंज हो रहा था. जब उसने मूह से निकाला तो एक बार, मेने उसके मर्द के लंड की ओर देखा और एक बार इनके. इनके आगे उसका कुछ भी नही था तब भी 6*7 इंच का तो रहा ही होगा. उसने जीभ से उसके सुपाडे को चटाना शुरू किया, जिसपे अभी भी पहले की चुदाई का रस लगा हुआ था. चाटते चाटते वो उसके बॉल्स तक पहुँच गयी और उसको भी चाटना शुरू कर दिया. अपने हाथ से वो उसके लंड को साथ साथ दबा रही थी भींच रही थी, यहा मेरा हाथ भी उनके सख़्त हो रहे लंड को दबा रहा था. वो उसको पकड़ के बाथ रूम मे ले गया.

उसकी निगाहे चारो ओर ढूंड रही थी, लेकिन कुछ नहीं दिखा तो केमोड पे ही वो बैठ के उसका कड़ा लंड हवा मे ताने खड़ा अपनी बीबी को उसने इशारा किया. पहले तो वो ना नुकुर करती रही लेकिन फिर आके दोनो टांगे उसके चारो ओर फैला के और उसका लंड सीधे उसकी बुर मे.

देखते देखते दोनो की चुदाई फुल स्पीड मे "ले ले मोटा लंड अपनी फु.. मे ले"

वो बोलता.

"दे दे राजा. चोद कस कस के देखती हू तेरी अम्मा ने कितना दूद्धू पिलाया है" वो भी धक्के का जवाब धक्के से दे के बोलती.

"अरे अम्मा पे जाती है, चल पहले अपना दूध पिला" और ये बोल के वो उसकी चूंची चूसने लगा. "ले ले देख मेरे मम्मो का रस पी तो ननद के मम्मो का रस भूल जाएगा." वो उसका सर पकड़ के बोलती. कुछ देर बाद वो उसके लेके उठा और सीधे शवर स्टॉल मे और नहाते हुए भी उनका काम जारी था खड़े खड़े. तभी उस लड़की की निगाह बाथ टब पे पड़ी और उस ने अपने मर्द के कान मे कुछ कहा. एक दम बोल के उस ने लंड निकाल लिया और उस को झुका के बोला, "चल बन जा कुतिया" वो एक दम झुकी हुई थी.

उसके मोटे चूतड़ हवा मे उठे हुए और मेहंदी लगे हाथो से उसने कस के टब को पकड़ रखा था. उस के मर्द ने टांगे फैलाई और एक बार मे ही आधा पेल दिया. उस की चीख निकल गयी, "अरे यार हौले से क्या मेरी ननद की फुददी समझ रखी है जो चौदह साल की बाली उमर से चुद रही है." मैं समझ रही थी कि ये चीखना सब नखडा है. वो चाहती है कि उस का मर्द खूब कस कस के चोदे, इसलिए उसे छेड़ रही है. और हुआ यही उस की हालत खराब हो गयी थी. उस के लटके हुए मम्मे पकड़ के उसने एक बार मे ही पूरा ठूंस दिया. हालत तो उनकी भी खराब हो रही थी, जिस तरह उनका लंड पत्थर की तरह सख़्त हो गया था और जिस तेज़ी से वैसलीन लगी उंगलियो से वो मेरी चूत मे उंगली कर रहे थे.

"हे चल हम भी करते है ना". वो बोले. "एक दम.. सिर्फ़ देखने मे क्या रखा है."

मैं भी बोली. मन तो मेरा भी बहुत करने लगा था. "तो चल झुक बन जा उसी तरह से."

मालूम तो मुझे था मैं कितनी किताबो मे इस के बारे मे पढ़ चुकी थी लेकिन मेने उन्हे गाइड करने दिया. थोड़ी ही देर मे मैं झुकी हुई दोनो हाथो के बल, हाथ मुड़े हुए, और पैर भी, खूब फैले और मेरे निटम्ब हवा मे. उन्होने मेरी कमर तक पेट के नीचे कुशन लगा दिए थे और हाथो के नीचे भी मुलायम तकिया. पहले तो वो थोड़ी देर मेरे नितंबो को वो सहलाते रहे, मेरे पिछवाड़े वाले हॉल को भी उन्होने प्यार से हल्के से छू दिया. फिर छेड़ते हुए सुपाडे से उसे सहला दिया,

"हे उधर नही." मैं ज़ोर से चीखी.

"क्यो क्या इसे मेरे साल्लो के लिए बचा के रखा है." वो सूपड़ा वही पे रगड़ते बोले.

"तुम्हारे साल्लो के लिए मेरी ननद है ना, देखना कैसे उसे वो ननद सालियो को अपनी साली बनाते है.. प्लीज़ पर इधर नही"

"चलो आज माफ़ कर दिया पर कब तक बचा के रख पओगि इसे." उसे वहाँ से हटा के सीधे चूत पे रगड़ने लगे.

ये बात तो मैं भी जानती थी. बचाने वाली नही है ये. मम्मी ने शादी के पहले ही बता दिया था कुछ आदमी बूब्स मे होते है और कुछ इस में, ये दोनो है.

उन्होने चूत की पुट्तियो को फैला के अपने सूपड़ा सटाया और फिर मेरी पतली कमर पकड़ के, एक करारा धक्का मारा. एक बार मे ही आधा लंड अंदर घुस गया. उसके बाद तो उनकी चाँदी थी. कभी वो मेरी गदराई चूंची पकड़ के मसलते, कभी फूले हुए गुलाबी गाल कचा कचा के काट लेते और साथ साथ मेर उभरे रसीले नितंबो को सहलाते. चार पाँच धक्को के बाद, उन्होने उसे सूपदे तक निकाल के धक्के मारने शुरू कर दिए. और उनके हर धक्के के साथ मेरी करधनि, कमर बंद झनेक उठती कस कस के. लेकिन इस पोज़ मे मेरी चूत थोड़ी सी बंद बंद थी. पूरी ताक़त से पेलते हुए, उनके मूह से निकला, साली निहुर ठीक से. मुझे उनसे ऐसी उम्मीद नही थी कि वो मेने शिकायत भरी निगाह से चेहरा घुमा के उनकी ओर देखा और बोली, 'हे कैसे बोलते है'. मुझे चूम के वो बोले, 'अरे तुम मुझे मेरी बहन के साथ नाम जोड़ के इतना बोल रही थी तो कुछ नही.' मैं समझ गयी ये क्या सुनना चाहते है. मेने बन कर कहा, 'मेने आप को कोई गाली थोड़ी दी'.

"अच्छा, तो जो अंजलि का, मेरी बहनो का नाम लगा के अभी बोल रही थी वो" कस के चूंची मीजते वो बोले. मेने भी अपनी चूत मे कस के उनके लंड को सिकोड के बोला,

"अरे वो बेहन्चोद को बेहन्चोद बोलना कोई गाली थोड़े ही है."

"अच्छा मैं क्या हू ज़रा फिर से तो बोल" ये कहते हुए उन्होने मेरी चूत के अंदर रगड़ते हुए, करारे धक्के के लिए, सूपदे तक बाहर निकाल किया. मैं मज़े से गनगना गयी और बोली, "तुम बहन चोद और अगर अभी तक नही हो (धीरे से बोली मैं लेकिन इस तरह की वो सुन ले).अगर मेने तुमसे तुम्हारी बहन की, अंजलि की फुददी नही चुदवाइ तो कहना.

(अगर ये आप जानने ही चाहते है कि मेरे हब्बी ने अंजलि की ली कि नही तो पढ़े, 'मज़ा लूटा होली मे').

बस मेरा इतना पालिता लगाना काफ़ी था. मेरे चूतड़ पकड़ के उन्होने वो कस कस के धक्के लगाए, मैं चीखती रही, चिल्लती रही पर ये पूरी ताक़त से और साथ साथ बोलते भी जा रहे थे.

"मेरी बहन की चूत के पीछे बाद मे पड़ना साली, आज देख कैसे चोद चोद के तेरी चूत का बुरा हाल करता हू ले ले घोंट गपा गॅप."

क्रमशः……………………………………

शादी सुहागरात और हनीमून--33

gataank se aage…………………………………..

halat to meri bhi kam kharaab nahi thi. unki jibh aur honth meri choot ki puttiyo ko khub kas ke choos chat rahe the aur sath sath clit ko bhi. lekin andar dono ungaliya ghusi thi, puri gaharayi tak vaisalin chupadati. unhone vaislin ki bottle meri badha di.

mene hath badha ke use pakad liya.

khub sari vaisalin le ke, mene unke khade kade 'charm dand' pe achchi tarah pot diya. phir 'use' dono hatho me le ke, jaise koyi gvalan mathani mathe, (ab wo meri ek mutthi me samane layak nahi rah gaya tha) itane achcha lag raha tha use chune kitane kada kada mene thodi aur vaisalin li aur sidhe usaki jad se, (unke bhi ek bhi baal nahi the, lagta tha jaise abhi just shave kiya ho) leke sidhe upar tak phir se lithad ke malane masalane lagi. ek dam chamak raha tha wo, vaislin lagane se.

chamadi ko hata ek baar phir se mene unke supade ko khol diya. wo ab aur phul suj gaya tha. teen ungaliyo me, dher sari vaisalin nikal ke mene unke supade pe achchi tarah lipad chupad diya. uske beech se usaki 'ankh' abhi bhi jhaank rahi thi.

shararat se mene ek ungali me vaislin leke, jaise koyi tilak lagaye us pe laga diya.

wo bekarar ho rahe the aur main bhi. jitane takiye kushan the sab unhone mere chutado ke niche laga diye aur meri bethi phaili jaangho ke beech aa gaye. abhki unhone meri taange modi nahi, balki khub kas ke chaudi kar di aur apni ungaliyo se meri puttiyo ko khol ke sidhe lund andar thel diya. mera chutad itane utha tha mujhe saph saph dikh raha tha ki kaise inch inch, sut sut unka mota lund meri kasi choot me ghisat ragad ke ja raha tha. abhki unhe koyi jaldi nahi thi. wo meri patali kamar aur mote chutad pakad ke dhire dhire thel rahe the. kamare ki sari roshani jal rahi thi. main dekh rahi thikaise sarak sarak kemasti se meri halat kharaab ho rahi thi. ek tihayi abhi bahar raha hoga ki ab usak ghusane mushkil lag raha tha. wo apni kamar se puri takat sedard ke mare meri bhi phati ja rahi thi. unse nahi raha gaya. meri dono taange unke kandhe pe aur meri kalayi pakad ke unhone.ek bar phir meri adhi chudiya tut gayi. dard ke mare main chikh padi. bachchedani pe jaise hi supade ne kas ke thokar marimasti se meri halat kharaab ho gayi. ghus to pura gaya lekin jaise kisi patali gardan vali shishi me koyi khub mota sa kark thuns debas vahi halat meri ho rahi thi. wo ab meri clit pe apne lund ka bes halke halke ragad rahe the aur apne ap meri kamar bhi sath sath.

jaise kabhi imtahan me jab parcha bante to sab kuch bhul jaye lekin baad me dhire dhire yaad ane lage vahi halat meri ho rahi thi. pahale din to kuch bhi nahi yaad raha,

kya saheliyo ne bataya, kya bhabhiyo ne sikhayalekin ab dhire dhire sab kuchabhabhi ki trenimg, jo meual me padha, dekha, jim me excercise ki aaj sham ko hi bhabhi ne phone pe baat karate samay daant lagayi thi, shadi ke baad se mene p.c excercise karani band kar di thi. bhabhi ne daant ke kaha tha, har do tin ghante baad bhale hi sab ke sath baithi ho apni choot dhire dhire 20 second tak sikodo aur phir puri takat se 20 second tak sikod ke rakho aur phir halke halke 20 second tak relax karo.. 5 se 10 baar tak aur sikodate samay ye hamesha socho ki teri bur me rajiv ka lund hai.

jab mene hans ke kaha ki bhabhi agar wo jab sach much me andar ho to wo boli. phir to chodane mat, jarur karane. ye sochate sochate apne aap meri choot unke lund pe sikudane lagi aur kas ke bhinch diya. mujhe ye nahi pata tha isaka itane jor daar asar hoga, masti se unki halat kharaab ho gayi. wo kas kas ke meri chunchiya masalane lage, chumane lage aur phir unhone wo jabaradst chudayi shuru kar di ki bas.. pose badal badal ke, kabhi meri dono taange duhar dete,.. kabhi utha dete, kabhi ek unke kandhe pe aur dusari phaili piston ki tarah lund dhaka dhak andar bahar.. satasat satasat.. meri chunchiya kas ke masal ke wo bole, 'kyo aa raha hai maja chudvane me'. 'ek dam' main boli. le le mera lund dono hatho se mera chutad pakad ke wo bole.

'dede ne..' mene bhi apni taange unki pith ke piche kainchi ki tarah phansa di aur kamar uthati boli.

unhone mujhe utha ke apni god me baitha liya tha aur unki dhakka pel chudayi chalu thi. ek hath se wo mere joban masalate aur dusare se meri pith pakad ke kas kas ke. aur main bhi unka sath de rahi thi. 'kaisa lag raha hai mera lund', unhone kas ke dhakka lagate hye pucha. javab meri choot ne diya.. kas ke unke lund ko bhinch ke.

'teri chunchiya badi mast mast hai' kas ke unhone kaat ke kaha. mene bhi unhe unke seene me ragad diya. he tu bhi to bol, unse nahi raha gaya. halke se unke ear lobs mene kaat liye. 'haa achcha lag raha hai', main halke se boli. 'are kya achcha lag raha hai, bol nahi to' wo lund almost bahar nikaal ke bole aur chudayi rok di. unke kaan me jeebh ki nok se sahalate huye main dhime se boli, 'chudvane mere raja'. phir kya tha, unhone mujhe god me liye liye dhakka pel chudayi shuru kar di. mujhe laga ki ham dono kinere ki or badh rahe hai lekin thodi der me unhone phir palata.

ab meri paayal aur bichuye khamosh the aur meri chaudi neyi karadhan ki dhun sun rahe the. main upar thi aur wo niche. halanki dhakke abhi bhi vahi laga rahe the, niche se apne chutad utha utha ke, meri patali kamar pakad ke mujhe apne lund pe upar niche kar ke kuch der me main bhi unka sath dene lagi. jab vah uchka ke lund bahar nikaal dete to main apni kamar aur nitambo ke jor se dhire dhire, til til use andar leti aur bahati roshani me use sarakate hue andar jate huye dekhati. jab meri choot pura lund ghont leti to apne aap use bhinchane lagati, choot sikudane lagati. kuch hi der me main n srirph unka sath de rahi thi balki kas kas ke dhakke bhi. halanki jald hi main thak bhi rahi thi. lund jab ek dam jad tak ghus gaya to mene unke dono hath kas ke pakad liye (jaise wo meri kalaiya pakadate the), aur lund ko jara bhi bahar nikale bina,

thoda unki or jhuk ke age piche karane lagi. supada sidhe meri bachchedani se ragad kha raha tha aur lund ka base meri clit se. masti se ham dono ki halat kharaab thi.

mene dekha ki unki nigahe sidhe meri jhuki chunchiyo pe hai, mujhe shararat sujhi. mene apne kishor joban unke chehare ke upar kiye aur jaise hi wo chumane ko badhe, use dur hata liya. main use paas le jati aur jaise hi lalach ke wo paas aate bas main hata leti. meri khade nipples unke hontho se ek inch dur rahe honge ki mene pucha,

"bahut man kar raha hai?"

"haa" wo bethi ho ke bole.

"achcha to mera bada hai ki anjali ka" unke hontho ko kishor joban se chulake mene pucha.

"tumhara bada hai." wo besabare ho rahe the.

"bas ek saval aur, sahi bologe to milega. anjali ka dabavane layak ho gaya hai ki nahi?".

"haa..haa ho gaya hai."

"oh pura bolo naa kya dabavane layak ho gaya hai." mene chunchi unki pahunch se dur hata li.

"usaki usaki chati sine joban. chunchi"

"are pura bolo naa anjali ki chunchi kis layak ho gayi hai" aur meri choot ne kas ke unka lund bhinch diya. meri satrah saal ki javan chunchiya bhi ab unke chehare ke paas thi.

"usaki usaki anjali ki chunchi dabavane layak ho gayi hai." wo bole " are to dabate kyo nahi us mast maal ki chunchidekh tumase mene apni nanad ki chunchi ne dabavayi to kahane." ye kah ke mene apni chunchi unke hontho ke beech kar di aur kas kas ke chodane shuru kar diya. lekin unhone palat ke mujhe niche kar diya aur jabaradst chodate hue bole,

"are pahale apni chunchi to dabava lo, phir baad me apni nanad ka intajaam karane."

"manjur hai mujhe.. chalo baad me hi sahi, ye to maan liya ki tumhara bhi man karata hai us ki chunchiya dabane ka." phir to unhone wo kas ke dhakke lagaye, main thodi hi der me jhadane lagi aur jab meri choot ne kas ke sath sath unke lund ko sikodane shuru kiya to sath me wo bhi.

aj jab unhone dudh ka glass mere muh se lagaya to ye janete huye bhi ki isamem kya pada haiaur isaka mujh pe kya asar hone vala hai, mene use gadap kar liya. wo aur shararati, dudh to unhone piya hi, rakhe rakhe usme malai si pad gayi thi. wo unhone do ungali me nikal ke mere choot pe lapeti aur lage chatane. aur iske baad jab wo upar aye to mene joda pan bhi apne hontho me le ke unke hontho me. tabhi meri nigah, bagal ke thile pe pade remote pe padi. dpahar ko unhone yahi rakh diya tha, mujhe yaad aya. mene pucha kyo chala du, aur wo hans ke bole ekdam.

wo, usaka lund lollipop ki tarah choos rahi thi. "sali kya gapa gap choos rahi hai." un ke muh se nikala. film kya kisi couple ki honeymoon me shot ki gayi film lag rahi thi kyonki camera angle bilkul bhi nahi change ho raha tha. jab usne muh se nikala to ek baar, mene uske mard ke lund ki or dekha aur ek baar ineke. ineke aage usaka kuch bhi nahi tha thi bhi 6*7 inch ka to raha hi hoga. usne jeebh se uske supade ko chatane shuru kiya, jisape abhi bhi pahale ki chudai ka ras laga hua tha. chatate chatate wo uske balls tak pahunch gayi aur usako bhi chatane shuru kar diya. apne hath se wo uske lund ko sath sath daba rahi thi bhinch rahi thi, yaha mera hath bhi unke sakht ho rahe lund ko daba raha tha. wo usako pakad ke bath roo me le gaya.

usaki nigahe charo or dhund rahi thi, lekin kuch nahim dikha to kamod pe hi wo baith ke usaka kada lund hava me tane khada apni bibi ko usne ishara kiya. pahale to wo ne nukur karati rahi lekin phir aake dono taange uske charo or phaila ke aur usaka lund sidhe usaki bur me.

dekhate dekhate dono ki chudayi full speed me "le le mota lund apni phu.. me le"

wo bolata.

"de de raja. chod kas kas ke dekhati hu teri amma ne kitane duddhu pilaya hai" wo bhi dhakke ka javab dhakke se de ke bolati.

"are amma pe jati hai, chal pahale apne dudh pila" aur ye bol ke wo usaki chunchi chusne laga. "le le dekh mere mammo ka ras pi to nanad ke mammo ka ras bhul jayega." wo usaka sar pakad ke bolati. kuch der baad wo uske leke utha aur sidhe shower stall me aur nehate hue bhi unka kaam jari tha khade khade. tabhi us ladaki ki nigah bath tub pe padi aur us ne apne mard ke kaan me kuch kaha. ek dam bol ke us ne lund nikal liya uar us ko jhuka ke bola, "chal ban ja kutiya" wo ek dam jhuki huyi thi.

uske mote chutad hava me uthe hue aur mehandi lage hatho se usne kas ke tub ko pakad rakha tha. us ke mard ne taange phailayi aur ek baar me hi adha pel diya. us ki chikh nikal gayi, "are yaar haule se kya meri nanad ki phuddi samajh rakhi hai jo chaudah saal ki bali umar se chud rahi hai." main samajh rahi thi ki ye chikhane sab nekhada hai. wo chahati hai ki us ka mard khub kas kas ke chode, isaliye use ched rahi hai. aur hua yahi us ki halat kharaab ho gayi thi. us ke latake hue mamme pakad ke usne ek baar me hi pura thuns diya. halat to unki bhi kharaab ho rahi thi, jis tarah unka lund patthar ki tarah sakht ho gaya tha aur jis teji se vaislin lagi ungaliyo se wo meri choot me ungali kar rahe the.

"he chal ham bhi karate hai ne". wo bole. "ek dam.. sirph dekhane me kya rakha hai."

main bhi boli. man to mera bhi bahut karane laga tha. "to chal jhuk ban ja usi tarah se."

malum to mujhe tha main kitani kitaabo me is ke bare me pad chuki thi lekin mene unhe guide karane diya. thodi hi der me main jhuki huyidono hatho ke bal, hath mude hue, aur pair bhi, khub phaile aur mere nitmb hava me. unhone meri kamar tak pet ke niche kushan laga diye the aur hatho ke niche bi mulayam takiya. pahale to wo thodi der mere nitambo ko wo sahalate rahe, mere pichavade vale hol ko bhi unhone pyar se halke se chu diya. phir chedate hue supadese use sahala diya,

"he udhar nahi." main jor se chikhi.

"kyo kya ise mere saallo ke liye bacha ke rakha hai." wo supada vahi pe ragadate bole.

"tumhare saallo ke liye meri nanad hai ne, dekhane kaise use wo nanad salliyo ko apni sali banete hai.. please par idhar nahi"

"chalo aaj maph kar diya par kab tak bacha ke rakh paogi ise." use vaha se hata ke sidhe choot pe ragadane lage.

ye baat to main bhi janeti thi. bachane vali nahi hai ye. mammi ne shadi ke pahale hi bata diya tha kuch adami boobs me hote hai aur kuch is men, ye dono hai.

unhone choot ki puttiyo ko phaila ke apne supada sataya aur phir meri patali kamar pakad ke, ek karara dhakka mara. ek baar me hi adha lund andar ghus gaya. uske baad to unki chaandi thi. kabhi wo meri gadarayi chunchi pakad ke masalate, kabhi phule hue gulabi gaal kacha kachaa ke kaat lete aur sath sath mer ubhare rasile nitambo ko sahalate. char paanch dhakko ke baad, unhone use supade tak nikaal ke dhakke marane shuru kar diye. aur unke har dhakke ke sath meri karadhani, kamar band jhanek uthati kas kas ke. lekin is pose me meri choot thodi si band band thi. puri taakat se pelate huye, unke muh se nikala, sali nihur thik se. mujhe unse aisi ummid nahi thi ki wo mene shikayat bhari nigah se chehara ghuma ke unki or dekha aur boli, 'he kaise bolate hai'. mujhe chum ke wo bole, 'are tum mujhe meri bahan ke sath naam jod ke itane bol rahi thi to kuch nahi.' main samajh gayi ye kya sunene chahate hai. mene ban kar kaha, 'mene ap ko koyi gaali thodi di'.

"achcha, to jo anjali ka, meri behano ka naam laga ke abhi bol rahi thi wo" kas ke chunchi mijate wo bole. mene bhi apni choot me kas ke unke lund ko sikod ke bola,

"are wo behanchod ko behanchod bolne koyi gaali thode hi hai."

"achcha main kya hu jara phir se to bol" ye kahate hue unhone meri choot ke andar ragadate hue, karare dhakke ke liye, supade tak bahar nikal kiya. main maje se ganegane gayi aur boli, "tum bahan chod aur agar abhi tak nahi ho (dhire se boli main lekin is tarah ki wo sun le).agar mene tumase tumhari bahan ki, anjali ki phuddi nahi chudavayi to kahane.

(agar ye aap jaanane hi chahate hai ki mere hubby ne anjali ki li ki nahi to padhe, 'maja luta holi me').

bas mera itane palita lagane kaphi tha. mere chutad pakad ke unhone wo kas kas ke dhakke lagaye, main chikhati rahi, chillati rahi par ye puri takat seaur sath sath bolate bhi ja rahe the.

"meri bahan ke choot ke piche baad me padane saali, aaj dekh kaise chod chod ke teri choot ka bura haal karata hu le le ghont gapa gap."

kramashah……………………………………