अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति compleet

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007
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Re: अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति

Unread post by 007 » 01 Nov 2014 09:59

शोभा के दोनों हाथ दीप्ति के सिर के पास जमीन पर टिके हुये थे और गांड हवा में उठी हुई थी. धीरे से धड़ नीचे करते हुये शोभा ने अपनी चूत को दीप्ति के होठों पर स्थापित कर दिया. दीप्ति ने हाथ बढ़ा शोभा की पिछली गोलाईयों को जकड़ा और सामने से भांप निकालती चूत को अपने मुहं में भर लिया. इधर नीचे दीप्ति पूरी बेरहमी से अपनी जीभ शोभा की चूत में रगड़ रही थी और ऊपर शोभा बहुत धीरे धीरे शरीर को आगे पीछे कर के अपनी क्लिट को दीप्ति के अगले दांतों पर रगड़ा रही थी. जबर्दस्त सामंजस्य था दोनों का.
आगे जो हुआ उसका दोनों औरतों को कोई गुमान नहीं था. ना तो दीप्ति को आज तक ऐसा आर्गैज्म आया था ना ही शोभा को. लेकिन शोभा के उछलते चूतड़ों की बढ़ती गति और सिकुड़ते फ़ैलते चूत के होठों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता था कि अब क्या होने वाला है.
जब शोभा की चूत की दीवारों से पानी छूटा वो जैसे अन्दर ही अन्दर पिघल गई वो. हरेक झटके के साथ उसका पेट भिंच जाता और फ़िर जोरों से एक हल्की सुनहरी धार चूत से फ़ूट पड़ती. अपने ही हाथों से अपने दुखते चूचों को बेदर्दी से मसल रही थी. उधर नीचे पेट में बच्चेदानी भी अपने आप ही फ़ैल सिकुड़ रही थी. शोभा का खुद पर से काबू खत्म ही हो गया. उसका झड़ना रुक ही नहीं रहा था. एक एक बाद एक लगातार आती बौछारों से दीप्ति का पूरा चेहरा भीग गया. शोभा को दिलासा देने के लिये की वो उसके नितम्बों को कस कर निचोड़ रही थी. ढेर सारा गाढ़ा द्रव्य पी लेने के कारण दीप्ति का गला अवरुद्ध हो गया पर वो लाचार थी.
दम घुटने लगा तो जोर से मुहं से सांस ली और दुबारा से एक साथ शोभा की चूत में रुका हुआ पानी उसके गले में भर गया. पर उसने चूत पर जीभ चलाना नहीं छोड़ा. शोभा का बदन अभी तक उत्तेजना और आनन्द के कारण कांप रहा था. थोड़ी देर में शोभा सुस्त हो कर दीप्ति के ऊपर ही गिर पड़ी. इस शक्तिशाली ओर्गैज्म ने उसके शरीर से पूरी ताकत निचोड़ ली थी. शोभा की चूत अभी तक दीप्ति के चेहरे पर रस टपका रही थी. दीप्ति को समझ में नहीं आ रहा था कि इतने पानी का वो क्या करे. खा पीकर ही तो शुरु की थी ये प्रणय क्रीड़ा दोनों ने और अब तो शोभा के पानी से भी उसका पेट भर गया था. उसके होठों से नकारे जाने पर वो चिकना द्रव्य दीप्ति के गालों और बालों से बहता हुआ जमीन तक आ गया और धीरे धीरे सरकते हुये उसके पैरों तक पहुंच गया. अब दोनों ही औरते एक दूसरे के रस से लथपथ हुई पड़ी थीं.
शोभा दीप्ति के शरीर पर से उतर कर जमीन पर उसके बाजु में आ गयी और उसकी तरफ़ चेहरा कर लेट गयी. दीप्ति ने शोभा की टांग उठा कर अपने ऊपर रखी और इस प्रकार दोनों औरतों की चूत एक दुसरे से चिपक गई. एक दूसरे को बाहों में लिये दोनों ही काफ़ी देर तक चुपचाप पड़ी रहीं. दोनों के जीवन में ऐसा पहले कभी ना हुआ था. दीप्ति शोभा को सहलाते पुचकारते हुये वापिस होशोहवास में आने में मदद कर रही थी.
"आपमें और मुझमें कोई मुकाबला नहीं है दीदी." शोभा बुदबुदाई. "जैसे अजय आपका है वैसे ही मैं भी आपकी ही हूं. आप हम दोनों को ही जैसे मर्जी चाहे प्यार कर सकती है. अगर ये सब मुझे आप से ही मिल जायेगा तो मैं किसी की तरफ़ नहीं देखूंगी" कहते हुये शोभा ने अपनी आंखें नीची कर ली.
शोभा के बोलों ने दीप्ति को भी सुधबुध दिलाई को वो दोनों इस वक्त हॉल में किस हालत में है. कुशन, कपड़े और फ़र्नीचर, सब बिखरा पड़ा था. इस हालत में तो दुबारा पहले की तरह कपड़े पहन पाना भी मुश्किल था. दीप्ति ने शोभा की गांड पर थपकी दी और बोली, "छोटी, हम दोनों को अब उठ जाना चाहिये. कोई आकर यहां ये सब देख ना ले".
"म्म्मं, नहीं", शोभा ने बच्चों की तरह मचलते हुये कहा और दीप्ति के एक मुम्मे को मुहं में भर लिया.
दीप्ति ने समझ बुझा कर उसे अपने से अलग किया. हॉल में बिखरे पड़े अपने कपड़ों को उठा कर साड़ी को स्तनों तक लपेट लिया और ऊपर अपने कमरे की राह पकड़ी. जाती हुई दीप्ति को पीछे से देख कर शोभा को पहली बार किसी औरत की मटकती गांड का मर्दों पर जादुई असर का अहसास हुआ.
दीप्ति ने पलट कर एक बार जमीन पर पसरी पड़ी शोभा पर भरपूर नज़र डाली और फ़िर धीमे से गुड नाईट कह ऊपर चढ़ गई.

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Re: अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति

Unread post by 007 » 01 Nov 2014 10:00

अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति--पार्ट -१०

शोभा की आंखें थकान और नींद से बोझिल हो चली थी और दिमाग अब भी पिछले २-३ महीनों के घटनाक्रम को याद कर रहा था. अचानक ही कितना कुछ बदल गया था उसके सैक्स जीवन में. पहले अपने ही भतीजे अजय से अकस्मात ही बना उसका अवैध संबंध फ़िर पति द्वारा संभोग के दौरान नये नये प्रयोग और अब बहन जैसी जेठानी से समलैंगिक सैक्स. किसी मादा शरीर से मिला अनुभव नितांत अनूठा था पर रात में इस समय बिस्तर में किसी पुरुष के भारी कठोर शरीर से दबने और कुचले जाने का अपना अलग ही आनन्द है. काश अजय इस समय उसके पास होता. किस्मत से एक ही बार मौका मिला था उसे परन्तु दीप्ति तो हर रात ही अजय से चुदने का लुत्फ़ लेती होगी. आज अजय मिल जाये तो उसे काफ़ी कुछ नया सिखा सकती है. अजय अभी नौजवान है और उसे बड़ी आसानी प्रलोभन देकर अपनी चूत चटवाई जा सकती है. फ़िर वो दीप्ति के मुहं की तरह ही उसके मुहं पर भी वैसे ही पानी बरसायेगी. मजा आ जायेगा.
पता नहीं कब इन विचारों में खोई हुई उसकी आंख लग गयी. देर रात्रि में जब प्यास लगने पर उठी तो पूरा घर गहन अन्धेरे में डूबा हुआ था. बिस्तर के दूसरी तरफ़ कुमार खर्राटे भर रहे थे. पानी पीने के लिये उसे रसोई में जाना पड़ेगा सोच कर बहुत आहिस्ते से अपने कमरे से बाहर निकली. सामने ही अजय का कमरा था. हे भगवान अब क्या करे. दीप्ति को वचन दिया है कि कभी अजय की तरफ़ गलत निगाह से नहीं देखेगी. पर सिर्फ़ एक बार दूर से निहार लेने से तो कुछ गलत नहीं होगा. दिल में उठते जज्बातों को काबू करना जरा मुश्किल था. सिर्फ़ एक बार जी भर के देखेगी और वापिस आ जायेगी. यही सोच कर चुपके से अजय के कमरे का दरवाजा खोला और दबे पांव भीतर दाखिल हो गई. कमरे में घुसते ही उसने किसी मादा शरीर को अजय के शरीर पर धीरे धीरे उछलते देखा. दीप्ति के अलावा और कौन हो सकता है इस वक्त इस घर में जो अजय के इतना करीब हो. अजय की कमर पर सवार उसके लन्ड को अपनी चूत में समाये दीप्ति तालबद्ध तरीके से चुद रही थी. खिड़की से आती स्ट्रीट लाईट की मन्द रोशनी में उसके उछलते चूंचे और मुहं से निकलती धीमी कराहो से दीप्ति की मनोस्थिति का आंकलन करना मुश्किल नहीं था.
"रंडी, कुतिया, अभी अभी मुझसे से चुदी है और फ़िर से अपने बेटे के ऊपर चढ़ गई" मन ही मन दीप्ति को गन्दी गन्दी गालियां बक रही थी शोभा. खुद के तन भी वही आग लगी हुई थी पर मन तो इस जलन से भर उठा कि दीप्ति ने उसे अजय के मामले में पछाड़ दिया है. उधर दीप्ति पूरे जोशोखरोश के साथ अजय से चुदने में लगी हुई थी. रह रहकर उसके हाथों की चूड़ियां खनक रही थी. गले में पड़ा मंगल्सूत्र भी दोनों स्तनों के बीच उछल कर थपथपा कर उत्तेजक संगीत पैदा कर रहा था और ये सब शोभा की चूत में फ़िर से पानी बहाने के लिये पर्याप्त था. पहले से नम चूत की दीवारों ने अब रिसना चालू कर दिया था. आभूषणों से लदी अजय के ऊपर उछलती दीप्ति काम की देवी ही लग रही थी. शोभा को अजय का लन्ड चाहिये था. सिर्फ़ पत्थर की तरह सख्त अजय का मासपिण्ड ही उसे तसल्ली दे पायेगा. अब ्यहां खड़े रह कर मां पुत्र की काम क्रीड़ा देखने भर से काम नहीं चलने वाला था.
शोभा मजबूत कदमों के साथ दीप्ति की और बढ़ी और पीछे से उसका कन्धा थाम कर अपनी और खींचा. हाथ आगे बढ़ा शोभा ने दीप्ति के उछलते कूदते स्तनों को भी हथेलियों में भर लिया. कोई और समय होता तो दीप्ति शायद उसे रोक पाती पर इस क्षण तो वो एक ऑर्गैज्म से गुजर रही थी. अजय नीचे से आंख बन्द किये धक्के पर धक्के लगा रहा था. उसे मां के दुख रहे मुम्मों का कोई गुमान नहीं था. इधर दीप्ति को झटका तो लगा पर इस समय स्तनों को सहलाते दबाते शोभा के मुलायम हाथ उसे भा रहे थे. कुछ ही क्षण में आने वाली नई स्थिति को सोचने का समय नहीं था अभी उसके पास. शोभा को बाहों में भर दीप्ति उसके सहारे से अजय के तने हथौड़े पर कुछ ज्यादा ही जोश से कूदने लगी.
"शोभा--आह--आआह", दीप्ति अपनी चूत में उठती ऑर्गैज्म की लहरों से जोरो से सिसक पड़ी। वो भी थोड़ी देर पहले ही अजय के कमरे में आई थी. शोभा की तरह उसकी चूत की आग भी एक बार में ठंडी नहीं हुई थी और आज अजय की बजाय अपनी प्यास बुझाने के उद्देश्य से चुदाई कर रही थी. अजय की जब नींद खुली तो मां बेदर्दी से उसके फ़ूले हुये लंड को अपनी चूत में समाये उठक बैठक लगा रही थी. कुछ ना कर पाया लाचार अजय. आज रात अपनी मां की इस हिंसक करतूत से संभल भी नहीं पाया था कि दरवाजे से किसी और को भी कमरे में चुपचाप आते देख कर हैरान रह गया. पर किसी भी तरह के विरोद्ध की अवस्था में नहीं छोड़ था आज तो मां ने.

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Re: अजय, शोभा चाची और माँ दीप्ति

Unread post by 007 » 01 Nov 2014 10:00


"शोभा तुम्हें यहां नहीं आना चाहिये था, प्लीज चली जाओ." दीप्ति विनती कर रही थी. शोभा के गदराये बदन को बाहों में लपेटे दीप्ति उसकी हथेलियों को अपने दुखते स्तनों पर फ़िरता महसूस कर रही थी. लेकिन अपने बेटे के सामने.. नहीं नहीं. रोकना होगा ये सब. किन्तु किशोर अजय का लंड तो मां के मुख से अपनी चाची का नाम सुनकर और ज्यादा कठोर हो गया.
दीप्ति ने शोभा को धक्का देने की कोशिश की और इस हाथापाई में शोभा के बदन पर लिपटी एक मात्र रेशमी चादर खुल कर गिर पड़ी. हॉल से आकर थकी हुई शोभा नंगी ही अपने बिस्तर में घुस गई थी. जब पानी पीने के लिये उठी तो मर्यादावश बिस्तर पर पड़ी चादर को ही लपेट कर बाहर आ गई थी. शोभा के नंगे बदन का स्पर्श पा दीप्ति के तन बदन में बिजली सी दौड़ गई. एकाएक उसका विरोध भी ढीला पड़ गया. अजय के लंड को चोदते हुये दीप्ति और कस कर शोभा से लिपट गई.
नीचे अजय अपनी माता की गिली हुई चूत को अपने लंड से भर रहा था तो ऊपर से चाची ने दाहिना हाथ आगे बढ़ा हथेली को संभोगरत मां पुत्र के मिलन स्थल यानि दीप्ति की चूत के पास फ़सा दिया. किसी अनुभवी खिलाड़ी की तरह शोभा ने क्षण भर में ही दीप्ति के तने हुये चोचले को ढूंढ निकाला और तुरंत ही चुटकी में भर के उस बिचारी को जोरों से मसल दिया. लंड पर चाची की उन्गलियों का चिर परिचित स्पर्श पा अजय मजे में कराहा, "चाचीईईईई". "हां बेटा", शोभा चाची ने भी नीचे देखते हुये हुंकार भरी. दीप्ति की चूत अजय के मोटे लंड के कारण चौड़ी हुई पड़ी थी और शोभा भी उसे बख्श नहीं रही थी. रह रह कर बार बार चूत के दाने को सहला छेड़ रही थी. दीप्ति बार बार अजय की जांघों पर ही कमर को गोल गोल घुमा और ज्यादा उत्तेजना पैदा करने की कोशिश कर रही थी. अब शोभा के मन में डर पैदा हो गया कि कहीं अजय उसकी चूत भरने से पहले ही झड़ ना जाये. दीप्ति के कंधे को छोड़ शोभा ने अपना हाथ उसकी बाहों के नीचे फ़सा दिया और बलपूर्वक दीप्ति को अजय के ऊपर से उठाने लगी. लन्ड के बाहर सरकते ही चुत में खाली जगह बन गई. दीप्ति तो पागलों की तरह खुद को शोभा के चंगुल से छुटने की कोशिश करने लगी. पर शोभा यहां ज्यादा ताकतवर साबित हुई. दिमाग चलाते हुये उसने तुरंत ही अपने दुसरे हाथ की पांचों उंगलियों को एक साथ कर दीप्ति की मचलती रिसती चुत में घुसेड़ दिया. दीप्ति की चूत में आया खालीपन तो भर गया परंतु शोभा की उन्गलियां अजय के लंड की भांति गीली और चिकनी नहीं थी अतः पीड़ा की एक लहर उसके चेहरे पर फ़ैल गई. अजय भी गुर्रा पड़ा. वो झड़ने की कगार पर ही था कि उसकी चाची ने मां की चूत को लंड पर से हटा लिया था. अब उसका पानी भी वापिस टट्टों में लौट गया था. शोभा ने दीप्ति को खींच कर जमीन पर गिरा दिया और खुद उसके ऊपर आ गई.
औरतों के बीच चलते इस मदन-युद्ध को देख अजय भौंचक्का रह गया. दोनों ही उसे प्यारी थी. खुद के आनन्द के लिये वो किसी एक को भी छोड़ने को तैयार नहीं था. अपनी चाची के पुष्ट भारी स्तनों और बुलबुलाती चूत की तस्वीर उसके दिमाग में अब भी ताजा थी जिसे याद कर वो रोज ही मुट्ठ मारता था. उसकी मां भी रोज रात को उसे स्त्री शरीर का सुख देती थी. दोनों ही औरतों से उपेक्षित अजय ने अपने बेबस तेल पिये लंड को मुट्ठी में भर लिया.